गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

असुर राजाओं ने महिलाओं पर कभी हाथ नहीं उठाया ।


असुर राजा कभी महिलाओं पर हाथ नहीं उठाते थे। जिनको राक्षस बोला गया वास्तव में वो राक्षस नहीं थे , वो भारत के मुलवासी शासक, मुलवासी राजा थे,इतिहासकार विजय महेश कहते हैं कि ‘माही’ शब्द का अर्थ एक ऐसा व्यक्ति होता है, जो दुनिया में ‘शांति कायम करे। अधिकांश देशो के राजाओं की तरह महिषासुर न केवल विद्वान और शक्तिशाली राजा थे, बल्कि उनके पास 177 बुद्धिमान सलाहकार थे। उनका राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरभूर था। उनके राज्य में होम या यज्ञ जैसे विध्वंसक धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कोई जगह नहीं थी।

आखिर क्या कारण था कि सुरों (देवताओं) ने हमेशा अपनी महिलाओं को असुरों राजाओं की हत्या करने के लिए भेजा। इसके कारणों की व्याख्या करते हुए विजय बताते हैं कि “देवता यह अच्छी तरह जानते थे कि असुर राजा कभी भी महिलाओं के खिलाफ अपने हथियार नहीं उठायेंगे। इनमें से अधिकांश महिलाओं ने असुर राजाओं की हत्या कपटपूर्ण तरीके से की है। अपने शर्म को छिपाने के लिए भगवानों की इन हत्यारी बीवियों के दस हाथों, अदभुत हथियारों इत्यादि की कहानी गढ़ी गई।

महीषासुर एक जननायक पुस्तक में संकलित एक महत्वपूर्ण लेख में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व दिशोम गुरु शिबू सोरेन कहते हैं, "जब बचपन में मैं रावण वद्ध और महिषासुर मर्दिनी दुर्गा के बारे में सुनता था तब अजीब लगता था। अजीब लगने की वजह यह थी कि महिषासुर और उसकी वेशभूषा बिल्कुल हमलोगों के जैसी थी। वह हमारी तरह ही जंगलों में रहता था, गायें चराता था, शिकार करता था। फिर एक सवाल जो मुझे परेशान करता था, वह यह कि आखिर देवताओं को हम असुरों के साथ युद्ध क्यों लड़ना पड़ा होगा। फिर जब बड़ा हुआ तो सारी बारें समझ आयी कि यह सब अभिजात्य वर्ग की साजिश थी, बहरहाल आज की युवा पीढ़ी स्वर्णों द्वारा फैलाये गए अंधविश्वास की सच्चाई को समझे और नये समाज के निर्माण में योगदान दें। 


संकलित: सु.म.कुवर