बुधवार, 23 मार्च 2022

गुजरात के डांग जिले का सुप्रसिद्ध हिल स्टेशन डोन

गुजरात का प्रसिद्ध हिल स्टेशन “डोन हिल स्टेशन (Don hill station gujarat)” गुजरात के दूसरे हिल स्टेशन के तौर पर जाना जाता है। अगर आप यहाँ पर जाने का प्लान बना रहे हैं तो जाने से पहले आप इस हिल स्टेशन के बारे में...

वैसे गुजरात में सापुतारा हिल स्टेशन भी बहुत फेमस है और यहाँ पर भी आप प्रकृति के सुन्दर नज़रों का आनंद ले सकते हैं। सापुतारा हिल स्टेशन डोन हिल्स स्टेशन से कुछ ही दूरी पर है।

डोन हिल्स स्टेशन के बारे में..

डोन हिल स्टेशन गुजरात के डांग (Dang) जिले में पठार पर स्थित है। यह समुद्र से 1000 मीटर की ऊंचाई पर है। यह हिल स्टेशन सापूतारा से कुछ ही दूरी पर है तथा गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है और अहवा से 30 किलोमीटर दूर है।

डोन हिल स्टेशन प्रकृति की गोद में बसा हुआ हरियाली से भरपूर हिल स्टेशन है यहाँ आते आते आप शहर के शोर शराबे और भीड़ भाड़ जैसी जिंदगी को भूल जाते हो।

डोन हिल को डोन गाँव के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ के निवासी आदिवासी है जिनकी कुल आबादी तकरीबन 1200 -1500 है। सदियों के मौसम में यहाँ के स्थानीय लोग पर्वतारोहण महोत्सव का आयोजन करते है।

यहाँ पर सुविधाओं का काफी ज्यादा अभाव है इस वजह से आपको यहाँ घूमने के लिए पैदल यात्रा करनी पड़ेगी और अपना खाना और पानी भी खुद लाना होगा।

डोन हिल स्टेशन में सुविधाओं का अभाव है और देखने और करने के लिए कम ही चीजें हैं इसलिए अगर आप यहाँ फैमिली के साथ आने की सोच रहे हैं तो एक बार विचार जरूर कर लें।

डोन हिल्स स्टेशन में करने के लिए कई चीजें है जब आप डोन हिल्स स्टेशन पर घूमने के लिए निकलेंगे तो रास्ते में सुन्दर नज़ारे आपका मन मोह लेंगे।

यहाँ दूर दूर तक हरी भरी पहाड़ियों और रुई जैसे उड़ते बादल आपको एक अलग ही दुनिया में ले जायेंगे। सभी हिल स्टेशन की तरह यहाँ भी आप जगहों पर घूमना और सुन्दर नज़ारे देखने का आनंद ले सकते हैं।

यह जगह ट्रैकिंग के लिए सही है तो अगर आपको लंबी दूरी पैदल चलकर तय करना पसंद है तो यह जगह आपको पसंद आएगी यहाँ पर यात्रा करना ज्यादा मुश्किल नही है। इसके अलावा आप आप यहाँ पर कैम्पिंग कर सकते हैं और कैंप फायर का आनंद ले सकते हैं।

इस हिल स्टेशन में परलान्डिंग जैसी सेवायें भी हैं तो अगर आप आसमान की सैर कर बादलों को नज़दीक से महसूस करना चाहते हो तो आप इस सेवा का लाभ ले सकते हैं लेकिन यह सेवा फ्री नही है इसके लिये आपको पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

सापुतारा के तुलना में यहाँ देखने के लिए बहुत ही कम जगह हैं। भले ही यह सापूतारा के बाद दूसरे हिल्स स्टेशन के नाम से मशहूर है लेकिन इसका विकास अभी पूरा तरह नही हुआ है हालाँकि सरकार इसका विकास करने का प्रयत्न कर रही है।


यहाँ पर ईगल का स्टेचू मुख्य व्यू व्यू पॉइंट है। यहाँ से आप सुन्दर नज़ारे देख सकते हो और सेल्फी वगैरह ले सकते हो। डोन हिल में सापुतारा से कम सुविधाएँ होने की वजह से यहाँ आपको भीड़ भी कम देखने को मिलेगी। इसके अलावा अगर आप बजट में हिल स्टेशन का आनंद लेना चाहते हैं डोन हिल बिलकुल सही है।

अगर आप वॉटरफॉल देखने के शौकीन है तो यहाँ पर सबसे पास गिरा वॉटरफॉल है जो की 65 km दूर है हालाँकि यहाँ पर भी आपको छिपे हुए वाटर देखने को मिलेंगे। इन वॉटरफॉल की जानकारी आप वहां के स्थानीय लोगों से ले सकते हो।


जब आप इस हिल की ऊंचाई पर चले जाते हैं तो वहां से छोटे छोटे गाँव देखने में बहुत ही खूबसूरत लगते हैं यहाँ पर बादलों का नज़ारा आपको बहुत ही पसंद आएगा। इसके अलावा आस पास के गाँवों की खेती और उनके जन जीवन का नज़ारा आपको काफी पसंद आयेगा।

डोन हिल, डांग जिले के डोन गाँव में आता है और यहाँ ठहरने के लिए कोई होटल या रिसोर्ट नही हैं अगर आप यहाँ पर बिना किसी प्लानिंग के आये हैं तो एक दिन की ट्रिप के बाद आपको वापिस घर लौटना ही पड़ेगा।

अगर आप फिर भी रुकना चाहते हैं तो रुकने के लिए सापूतारा और अहवा में ही आपको होटल मिलेंगे और अगर आप यहाँ पर कैम्पिंग करने जा रहे हैं तो अपना खाना पीना और बाकी सारी व्यवस्था साथ लेकर आयें।

डोन हिल स्टेशन मानसून (जुलाई से अक्टूबर) के महीने में घूमने का सबसे सही समय हैं। इसके बाद यहाँ का तापमान बढ़ने लगता है और इसी वजह से यहाँ अक्टूबर से जून तक पर्यटकों की संख्या भी कम देखने को मिलेगी।

किसी भी हिल स्टेशन जाने से पहले उसके मौसम की जानकारी जरूर ले लेनी चाहिए। इंटरनेट पर बहुत सी वेबसाइट और एप्प के माध्यम से आप डॉन हिल स्टेशन के मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकते हो।

आपको बता दूँ बीते समय के साथ वायु प्रदूषण काफी तेज़ी से बढ़ा है और हिल स्टेशन में भी इसका प्रभाव देखने को मिला है तो किसी भी हिल स्टेशन जाते समय उसकी एयर क्वालिटी को भी जरूर चेक करें।

बात अगर डॉन हिल स्टेशन की करें तो यहाँ का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 17डिग्री सेल्सियस रहता है। मानसून के मौसम में तापमान में गिरावट देखने को मिलती है इसके बाद तापमान में बढ़ोतरी होती है।

डोन हिल स्टेशन जाते समय आपको सड़कों की हालत की हालत काफी हद तक अच्छी मिलेगी और आपको बाइक या कार से जाते समय ज्यादा परेशानी नही उठानी पड़ती है।

डोन हिल स्टेशन पहुचने की दुरी:

अहवा से 30km, अहमदाबाद से 410.8 km (Via NH 48), सूरत से 168 km (via Gj SH 14), सापुतारा से 51 km (Via Dalwat Link Rd), वलसाड से 141 km, मुल्हेर से 31 km दूर है।

हवाई मार्ग से - यहाँ का सबसे निकटतम एयरपोर्ट सूरत है जो कि 173 किलोमीटर दूर है यहाँ पहुँचने के बाद डोन हिल पहुचने के लिए टैक्सी ले सकते हैं।

रेल्वे से - डोन से सबसे निकटतम रेल्वे स्टेशन सूरत ही है इसके बाद खेरवाड़ी स्टेशन, कस्बे सुकेने स्टेशन और वघई स्टेशन सबसे निकटतम है।

सड़क मार्ग से - सूरत और आस पास के शहरों में निजी कार सेवाएँ उपलब्ध हैं जिनसे आप डोन हिल स्टेशन पहुँच सकते हैं। इसके अलावा आप महाराष्ट्र साल्हेर मुल्हेर से बसों के माध्यम से भी डोन हिल स्टेशन जा सकते हैं।

संकलन : सुशिल म. कुवर

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गुरुवार, 17 मार्च 2022

प्रकृति और संस्कृति ही आदिवासीयों की मूल पहचान...

जोहार साथीयों..

माँ प्रकृति ने हमारी संस्कृति(पहिचान) की रक्षा के लिए हमें निम्नलिखित कुदरती शब्द दिये है जिन्हे मिटाना शरणार्थीयो के बस की बात नही है।

1)आदिवासी(Indigenous)
2)जोहार(Mother nature) 
3)धर्म-पुर्वी(Ante Christ)
4)संस्कृति(जल,जंगल,जमीन)(Culture)  

1) आदिवासी(Indigenous) : 

आदिवासी दो शब्दो से मिलकर बना है 
आदि+वासी
'आदि' का मतलब होता है 'सबसे पहले का' और 'वासी' का मतलब होता है 'वास करने वाला' अब हम इन्हे एक साथ जोडकर इसका मतलब जानते है। 
'सबसे पहले का' + 'वास करने वाला' मतलब इस इस देश में सबसे पहले वास करने वाला आदिवासी है।
अब हम इसे एक परिभाषा के रूप में समझने की कोशिश करेंगे-
आदि अनादी काल से एक ही भौगोलिक स्थान पर अपनी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति अनुसार जीवन जीने वाला मानव समुह अर्थात आदिवासी।

2) जोहार(Mother Nature) :

जोहार मतलब सबका कल्याण करने वाली माँ प्रकृति को नमन करना।
इस धरती पर प्रकृति(nature)-(धरती, जल, हवा, सुर्य,आकाश) इसे ही प्रकृति कहते है और इसी प्रकृति से धरती पर अलग अलग जीवो की अलग अलग पेड़-पौधो की उतपत्ती होती है और इसी माँ प्रकृति के कारण जीवन चक्र चलता है इसलिए इस धरती पर निवास करने वाला पहला मानव आदिवासी 'जोहार' शब्द का अभीवादन के रूप में बार बार उपयोग करता है।

3) धर्म-पुर्वी (Ante Christ) :

आदिवासी इस धरती का पहला मानव है जब आदिवासी के रूप में इस धरती पर मानव के रूप में जन्म हुआ था तब इस धरती पर धर्म नही था धर्म नाम की व्यवस्था मानव के व्यक्तित्व विकास  के बाद की व्यवस्था है इसलिए आदिवासी को धर्म पुर्वी कहा जाता है क्योंकि आदिवासी ईसामसी के जन्म से पहले से इस धरती पर वास कर रहा है क्योंकि प्रभु ईसु के माता-पिता भी इजरायल के यरूशलम के बायदा आदिवासी थे। 

4) संस्कृति (Culture) :

आदिवासी सांस्कृतिक होते है उनकी पहिचान आदिवासीयो की पारंपारिक संस्कृति से होती है न की किसी धर्म से और संस्कृति का आधार जल, जंगल, जमीन है मतलब प्रकृति है और आदिवासी जिस स्थान पर रहता है  उस स्थान की भौगोलिक परिस्थिति और उस स्थान की प्रकृति के अनुसार ही जीवन जीता है जैसे
कशमीर लदाख में बर्फ होने से वो मोटे ऊनी कपडे पहनता है इसके लिए उसे कोई बताता नही है और रेगिस्तान में गर्मी के कारण आदिवासी कम कपडे पहनता है और अमेजन जैसे घने जंगल में किसी बाहरी व्यक्ति की आवक जावक नही होती तो वो जंगल को अपना घर समझता है और अपने लोगो को अपना परिवार तो बहुत कम कपडे पहनता है या नही पहनते है।
भोगोलिक स्थान और परिस्थिति के अनुसार ही आदिवासी की बोली,वेश भुषा,वाध यंत्र,औजार,अनाज,खान-पान,गीत गायन और सामाजिक व्यवस्था होती है।

जोहार जिंदाबाद