जोहार साथीयों..
माँ प्रकृति ने हमारी संस्कृति(पहिचान) की रक्षा के लिए हमें निम्नलिखित कुदरती शब्द दिये है जिन्हे मिटाना शरणार्थीयो के बस की बात नही है।
1)आदिवासी(Indigenous)
2)जोहार(Mother nature)
3)धर्म-पुर्वी(Ante Christ)
4)संस्कृति(जल,जंगल,जमीन)(Culture)
1) आदिवासी(Indigenous) :
आदिवासी दो शब्दो से मिलकर बना है
आदि+वासी
'आदि' का मतलब होता है 'सबसे पहले का' और 'वासी' का मतलब होता है 'वास करने वाला' अब हम इन्हे एक साथ जोडकर इसका मतलब जानते है।
'सबसे पहले का' + 'वास करने वाला' मतलब इस इस देश में सबसे पहले वास करने वाला आदिवासी है।
अब हम इसे एक परिभाषा के रूप में समझने की कोशिश करेंगे-
आदि अनादी काल से एक ही भौगोलिक स्थान पर अपनी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति अनुसार जीवन जीने वाला मानव समुह अर्थात आदिवासी।
2) जोहार(Mother Nature) :
जोहार मतलब सबका कल्याण करने वाली माँ प्रकृति को नमन करना।
इस धरती पर प्रकृति(nature)-(धरती, जल, हवा, सुर्य,आकाश) इसे ही प्रकृति कहते है और इसी प्रकृति से धरती पर अलग अलग जीवो की अलग अलग पेड़-पौधो की उतपत्ती होती है और इसी माँ प्रकृति के कारण जीवन चक्र चलता है इसलिए इस धरती पर निवास करने वाला पहला मानव आदिवासी 'जोहार' शब्द का अभीवादन के रूप में बार बार उपयोग करता है।
3) धर्म-पुर्वी (Ante Christ) :
आदिवासी इस धरती का पहला मानव है जब आदिवासी के रूप में इस धरती पर मानव के रूप में जन्म हुआ था तब इस धरती पर धर्म नही था धर्म नाम की व्यवस्था मानव के व्यक्तित्व विकास के बाद की व्यवस्था है इसलिए आदिवासी को धर्म पुर्वी कहा जाता है क्योंकि आदिवासी ईसामसी के जन्म से पहले से इस धरती पर वास कर रहा है क्योंकि प्रभु ईसु के माता-पिता भी इजरायल के यरूशलम के बायदा आदिवासी थे।
4) संस्कृति (Culture) :
आदिवासी सांस्कृतिक होते है उनकी पहिचान आदिवासीयो की पारंपारिक संस्कृति से होती है न की किसी धर्म से और संस्कृति का आधार जल, जंगल, जमीन है मतलब प्रकृति है और आदिवासी जिस स्थान पर रहता है उस स्थान की भौगोलिक परिस्थिति और उस स्थान की प्रकृति के अनुसार ही जीवन जीता है जैसे
कशमीर लदाख में बर्फ होने से वो मोटे ऊनी कपडे पहनता है इसके लिए उसे कोई बताता नही है और रेगिस्तान में गर्मी के कारण आदिवासी कम कपडे पहनता है और अमेजन जैसे घने जंगल में किसी बाहरी व्यक्ति की आवक जावक नही होती तो वो जंगल को अपना घर समझता है और अपने लोगो को अपना परिवार तो बहुत कम कपडे पहनता है या नही पहनते है।
भोगोलिक स्थान और परिस्थिति के अनुसार ही आदिवासी की बोली,वेश भुषा,वाध यंत्र,औजार,अनाज,खान-पान,गीत गायन और सामाजिक व्यवस्था होती है।
जोहार जिंदाबाद
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